Amul
ऐसा ब्रांड जो आज किसी पहचान की मोहताज नहीं है। Amul तो वैसे बहुत प्रोडक्ट बनाता है। लेकिन सभी प्रोडक्ट की बात करें तो सबसे पहले दिमाग में दूध ही आता है। Amul dairy के ज्यादातर प्रोडक्ट दूध से ही बने होते हैं और यह तो सभी को पता है दूध से बनी चीजों का जल्दी खराब होने का डर भी रहता है इसलिए Amul dairy अपने प्रोडक्ट की अच्छी क्वालिटी का भी ध्यान रखता है। भारत में शायद ही कोई घर ऐसा हो जो Amul का कोई प्रोडक्ट यूज ना करता हो।
Amul की स्थापना 14 दिसंबर 1946 मैं एक डेरी यानी दुग्ध उत्पाद के सहकारी आंदोलन के रूप में हुई थी। इसका मूल आणद (गुजरात) में है। Amul एक ब्रांड है जो गुजरात सहकारी दूध उत्पादक संघ नाम की सरकारी संस्था के प्रबंधन में चलता है। Amul के बनाए प्रोडक्ट की बात करें तो दूध, दूध पाउडर, बटर, चॉकलेट, चीज, दही, आइसक्रीम, श्रीखंड, गुलाब जामुन, पनीर, न्यूट्रामुल आदि प्रोडक्ट बनाता है।
Amul शब्द का अर्थ:-
Amul शब्द का अर्थ आनंद मिल्क यूनियन लिमिटेड है।
Amul dairy के मालिक (संस्थापक)
वर्गीज कुरियन (Verghese Kurien) और त्रिभुवदास किशीभाई पटेल (Tribhuvandas Kishibhai Patel) Amul dairy के संस्थापक है।
Amul dairy की स्थापना:-
Amul देश की प्रसिद्ध डेरी की स्थापना 14 दिसंबर 1946 को हुई। गुजरात में स्थित आनंद मैं Amul का पहला प्लांट है। बात भारत की आजादी के समय की है जब भारत देश की आजादी की लड़ाई लड़ रहा था तो वही भारतीय किसानों का आर्थिक व सामाजिक शोषण हो रहा था। उस समय गुजरात में राज चल रहा था Polson dairy का।
Polson dairy की स्थापना 1930 में हुई थी। Polson dairy ने जहां उत्तम वर्ग में अपनी जगह बनाई वहीं भारतीय किसानों को Polson dairy द्वारा शोषण का शिकार होना पढ़ रहा था। किसानों को अपने दूध का उचित पैसा भी नहीं मिल रहा था। किसानों की स्थिति दयनीय होती जा रही थी क्योंकि किसानों की कमाई का पैसा दलाल खा रहे थे।
किसानों की स्थिति सुधारने तथा उन्हें मजबूत करने के लिए क्रांतिकारी नेता सरदार वल्लभभाई पटेल आगे आए। सरदार पटेल को किसानों द्वारा आंदोलन शुरू किया गया गुजरात में एक मीटिंग में सहयोगी गांव में दुग्ध उत्पादन केंद्र बनाने की योजना पर विचार किया गया। छोटे किसान भी साथ आए उन्होंने भी साथ दिया। पहली संस्था आनंद में बनाई गई। इस सहकारी समूह को Amul नाम दिया गया जो आज देश भर में प्रसिद्ध है। 1948 मैं मुंबई योजना के अंतर्गत दुग्ध उत्पादन की सप्लाई शुरू की गई तथा 1973 में यह गुजरात सहकारी दुग्ध मार्केटिंग फेडरेशन लिमिटेड मैं तब्दील होकर Amul नाम से पूरे देश में ख्याति पाई।
गिनीज वर्ल्ड ऑफ रिकॉर्ड मैं नाम:-
"Utterly Butterly Delicious Amul" विख्यात यह जिंगल आज भी लोगों के मुंह पर चढ़ा हुआ है। Amul का यह विज्ञापन टीवी चैनलों, न्यूज़पेपर व मैगज़ीन में भी पढ़ने व देखने को मिलता है। Amul के इस जिंगल की प्रसिद्धि का पता का पता इसी से चलता है कि अपने टाइम का यह मशहूर विज्ञापन गिनीज बुक ऑफ रिकॉर्ड में भी अपना नाम लिखवा चुका है। Amul ने अपने विज्ञापन में कभी किसी बड़ी हस्ती को नहीं लिया है। उसका विज्ञापन सिंपल सरल है। आज भी लोगों के जुबान पर चढ़ा हुआ है। Amul का मकसद अपने ग्राहकों को उच्च व अच्छी क्वालिटी के प्रोडक्ट प्रदान करना रहा है।
भारत के मिल्कमैन की उपाधि:-
वर्गीय कुरियन को भारत के मिल्कमैन भी कहा जाता है। दूध पाउडर के निर्माण में गाय के दूध का तो इस्तेमाल किया जाता था परंतु कुरियन ने भैंस के दूध से दूध पाउडर का निर्माण किया और ऐसा करने वाले वह दुनिया के पहले व्यक्ति बने। किसानों को दूध उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने तथा उनकी आर्थिक स्थिति सही करने में वर्गीज कोरियन ने अहम भूमिका निभाई है । वर्गीज कुरियन ने त्रिभुवन भाई पटेल के साथ मिलकर भारत को दूध के व्यवसाय में आत्मनिर्भर बनाया।
कुरियन ने त्रिभुवन भाई पटेल के साथ मिलकर गुजरात के 2 गांवों को साथ लाकर dairy सहकारिता संघ की स्थापना की।
Amul मॉडल को दूसरे राज्यों में भी फैलाना:-
Amul की सफलता का प्रमाण इसी बात से मिलता है कि उस समय के तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने Amul मॉडल को दूसरी राज्यों में फैलाने के लिए राष्ट्रीय दुग्ध विकास बोर्ड (एनडीडीवी)
की स्थापना की। एनडीटीवी ने ऑपरेशन फ्लड की शुरुआत करके भारत को दुनिया का सबसे बड़ा दुग्ध उत्पादन देश बना दिया। एनडीटीवी में वर्गीज कुरियन ने अध्यक्ष पद पर रहकर अपनी सेवा दी।
Amul दो तरह की franchise
Amul दो तरह की franchise ऑफर करता है। यदि आप Amul आउटलेट, Amul रेलवे पार्लर या Amul क्योस्क की फ्रेंचाइजी लेना चाहते हैं तो इसमें लगभग 2 लाख रुपए का निवेश करना होगा। इसमें नॉन रिफंडेबल ब्रांड सिक्योरिटी के तौर पर 25 हजार रुपए, रिनोवेशन पर 1 लाख रुपए, इक्वीपमेंट पर 75 हजार रुपए का खर्च आता है। इसकी अधिक जानकारी आपको फ्रेंचाइजी पेज पर मिल जाएगी। https://www.franchiseindia.com/brands/AmulScoopingParlours.14860
अगर आप Amul आइसक्रीम स्कूपिंग पार्लर (Amul Ice cream scooping parlour) चलाना चाहते हैं और इसकी फ्रेंचाइजी के लिए प्लान करना है तो इसका निवेश थोड़ा ज्यादा है। इसे लेने के लिए आपको करीब 5-6 लाख रुपए का निवेश करना होगा। इसमें ब्रांड सिक्योरिटी 50 हजार रुपए, रिनोवेशन 4 लाख रुपए, इक्वीपमेंट 1.50 लाख रुपए शामिल हैं।
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